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16.07.202605:56 विदेशी मुद्रा विश्लेषण और समीक्षा: GBP/USD मुद्रा जोड़ी का अवलोकन। 16 जुलाई। ब्रिटिश पाउंड की तेजी थमने का नाम नहीं ले रही।

Exchange Rates 16.07.2026 analysis

बुधवार को GBP/USD मुद्रा जोड़ी बिना किसी स्पष्ट कारण के तेज़ी से ऊपर बढ़ी। मंगलवार को भी पाउंड में 100 पिप्स से अधिक की अस्थिरता (Volatility) देखने को मिली, जिसे जून के अमेरिकी महंगाई (Inflation) के आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है। ट्रेडर्स को उम्मीद थी कि अमेरिका की महंगाई दर 3.8% रहेगी, लेकिन वास्तविक आंकड़ा 3.5% आया। इसके बाद बाजार में फेडरल रिजर्व की अगली दो बैठकों में हॉकिश (Hawkish) रुख अपनाने की उम्मीदें तुरंत कम हो गईं। हालांकि, आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर में कुछ मजबूती फिर भी देखने को मिल सकती है।

इस सप्ताह के शेष दिनों में ब्रिटेन और अमेरिका दोनों में कोई बड़ा आर्थिक कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। ऐसे में लगातार तीन सप्ताह की तेजी के बाद बाजार में तकनीकी सुधार (Correction) आने की संभावना बढ़ जाती है।

कुल मिलाकर, अब ब्रिटिश पाउंड का भविष्य मुख्य रूप से भू-राजनीतिक घटनाओं तथा बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) और फेडरल रिजर्व (Fed) के फैसलों पर निर्भर करेगा। लेकिन इन दोनों केंद्रीय बैंकों के निर्णय भी काफी हद तक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर ही निर्भर हैं।

फिलहाल विश्लेषक केवल यह अनुमान लगा सकते हैं कि वर्ष के अंत तक केंद्रीय बैंक क्या कदम उठाएंगे। ऐसा लगता है मानो "अनुमान लगाने का खेल" शुरू हो गया हो। लगभग हर विशेषज्ञ यह बताने में लगा है कि ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ी है या घटी है। लेकिन बहुत कम लोग इस तथ्य का उल्लेख करते हैं कि अंततः सब कुछ तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा, और तेल की कीमतें मुख्य रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति से प्रभावित होंगी।

इसी कारण वर्ष के अंत तक BoE और Fed क्या करेंगे, इसका अनुमान लगाना फिलहाल व्यावहारिक नहीं है। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि निर्णय परिस्थितियों के अनुसार ही लिए जाएंगे।

यदि ब्रिटेन में महंगाई लगातार बढ़ती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड को भी मौद्रिक नीति सख्त करने पर विचार करना पड़ सकता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि फिलहाल कोई नहीं जानता कि महंगाई आगे बढ़ेगी या नहीं। क्या यह इतनी ऊंची पहुंचेगी कि BoE को हस्तक्षेप करना पड़े? इस समय अनिश्चितता अपने चरम पर है।

बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने कभी भी ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन पिछले कुछ महीनों के महंगाई के आंकड़े अभी ऐसी सख्ती की मांग नहीं करते। इसलिए फिलहाल BoE के पास इंतजार करने और स्थिति पर नजर बनाए रखने का विकल्प मौजूद है।

दूसरी ओर, अमेरिका में महंगाई पहले ही घटने लगी है। यदि मध्य पूर्व का संघर्ष फिर से शांत हो जाता है, तो महंगाई में और गिरावट जारी रह सकती है। ऐसी स्थिति में फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

यही कारण है कि फिलहाल "डॉट प्लॉट" (Dot Plot), विशेषज्ञों के पूर्वानुमान और Fed तथा BoE के अधिकारियों के संकेतों का अधिक महत्व नहीं है, क्योंकि परिस्थितियां पलक झपकते ही बदल सकती हैं।

सभी प्रमुख केंद्रीय बैंकों में केवल यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) का रुख अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देता है। क्रिस्टीन लगार्ड के अनुसार, यूरोपीय अर्थव्यवस्था को पहले ही नुकसान पहुंच चुका है, इसलिए ECB वर्ष 2026 में फिर से ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है। कम से कम फिलहाल ब्याज दरों को लेकर ECB का दृष्टिकोण स्पष्ट है। हालांकि, यदि महंगाई लगातार घटती रही, तो उसमें भी बदलाव संभव है।

हम अभी भी अमेरिकी डॉलर में बहुत मजबूत और लंबी अवधि की तेजी की उम्मीद नहीं करते, भले ही फेडरल रिजर्व भविष्य में अपनी मौद्रिक नीति को सख्त कर दे। GBP/USD मुद्रा जोड़ी पिछले एक वर्ष से साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर एक साइडवेज़ (Sideways) दायरे में कारोबार कर रही है और निकट भविष्य में भी इसके इसी दायरे में बने रहने की संभावना है। चूंकि 2022 से शुरू हुआ दीर्घकालिक रुझान अभी भी कायम है, इसलिए हमारी दीर्घकालिक उम्मीद पाउंड में बढ़त की ही बनी हुई है।

Exchange Rates 16.07.2026 analysis

पिछले 5 ट्रेडिंग दिनों में GBP/USD मुद्रा जोड़ी की औसत अस्थिरता (Volatility) 85 पिप्स रही है। पाउंड/डॉलर जोड़ी के लिए इसे "औसत" अस्थिरता माना जाता है। गुरुवार, 16 जुलाई को इस मुद्रा जोड़ी के 1.3446 से 1.3616 के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। ऊपरी लीनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channel) नीचे की ओर झुका हुआ है, जो गिरावट (Downtrend) का संकेत देता है।

वहीं, CCI (Commodity Channel Index) ने बियरिश डाइवर्जेंस (Bearish Divergence) बनाया है और ओवरबॉट (Overbought) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है, जो इस बात का संकेत है कि कीमत में नीचे की ओर तकनीकी सुधार (Downward Correction) आने की संभावना बढ़ रही है।

निकटतम समर्थन (Support) स्तर:

  • S1 – 1.3489
  • S2 – 1.3428
  • S3 – 1.3367

निकटतम प्रतिरोध (Resistance) स्तर:

  • R1 – 1.3550
  • R2 – 1.3611
  • R3 – 1.3672

ट्रेडिंग सुझाव:

GBP/USD मुद्रा जोड़ी अभी भी गिरावट (Downtrend) में बनी हुई है।

डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां आगे भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं, इसलिए दीर्घकाल में अमेरिकी डॉलर में मजबूत बढ़त की उम्मीद नहीं की जा रही है। हालांकि, 2026 में भू-राजनीतिक घटनाओं और अब फेडरल रिजर्व द्वारा प्रमुख ब्याज दर बढ़ाने की संभावित तैयारी के कारण डॉलर के लिए माहौल काफी सकारात्मक दिखाई देता है।

इसके बावजूद, साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर यह मुद्रा जोड़ी पिछले चार वर्षों से बने व्यापक अपट्रेंड (Uptrend) के भीतर 1.3150 से 1.3780 के दायरे में साइडवेज़ (Flat) कारोबार कर रही है।

  • यदि कीमत मूविंग एवरेज (Moving Average) के ऊपर बनी रहती है, तो लॉन्ग (Buy) पोज़िशन 1.3611 और 1.3616 के लक्ष्य के साथ ली जा सकती हैं।
  • यदि कीमत मूविंग एवरेज के नीचे आ जाती है, तो शॉर्ट (Sell) पोज़िशन 1.3306 के लक्ष्य के साथ विचार योग्य होंगी।

चार्ट में उपयोग किए गए संकेतकों का अर्थ:

  • लीनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channels): वर्तमान ट्रेंड की दिशा निर्धारित करने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में हों, तो ट्रेंड को मजबूत माना जाता है।
  • मूविंग एवरेज (20,0 Smoothed): यह अल्पकालिक (Short-term) ट्रेंड को दर्शाता है और यह संकेत देता है कि फिलहाल किस दिशा में ट्रेडिंग करना अधिक उपयुक्त हो सकता है।
  • मरे स्तर (Murray Levels): ये संभावित लक्ष्य (Target) और तकनीकी सुधार (Correction) के महत्वपूर्ण स्तर होते हैं।
  • वोलैटिलिटी स्तर (लाल रेखाएं): वर्तमान अस्थिरता के आधार पर अगले दिन कीमत के संभावित दायरे को दर्शाते हैं।
  • CCI (Commodity Channel Index): यदि यह -250 से नीचे (Oversold) या +250 से ऊपर (Overbought) पहुंच जाता है, तो यह मौजूदा ट्रेंड के विपरीत दिशा में संभावित ट्रेंड रिवर्सल (Trend Reversal) का संकेत देता है।

*यहां पर लिखा गया बाजार विश्लेषण आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए किया है, लेकिन व्यापार करने के लिए निर्देश देने के लिए नहीं |

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