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लेखक के अनुसार, ईरान की तीसरी रणनीतिक बढ़त (Trump Card), जिसका अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait) है। पहले तेहरान ने मध्य पूर्व के इस दूसरे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी थी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया है। हालांकि, लेखक का तर्क है कि जितना लंबा संघर्ष चलेगा और जितना अधिक दबाव ट्रंप डालेंगे, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी बंद किया जा सकता है।
लेखक के अनुसार, यमन इस जलडमरूमध्य के क्षेत्र पर प्रभाव रखता है और वहां ईरान समर्थित हूती (Houthis) तथा हिज़्बुल्लाह (Hezbollah) जैसे समूह सक्रिय हैं। उनका दावा है कि ये दोनों संगठन इस मार्ग की नाकेबंदी कराने में सक्षम हो सकते हैं। इसलिए, लेखक का मानना है कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
लेखक आगे कहते हैं कि ईरान की चौथी रणनीतिक बढ़त क्षेत्र में स्थित तेल और गैस के बुनियादी ढांचे, विशेषकर अमेरिका के सहयोगी देशों में मौजूद ऊर्जा परिसंपत्तियों को निशाना बनाने की क्षमता है। उनके अनुसार, यदि ऐसा होता है तो तेल और गैस की कीमतों में और तेज़ बढ़ोतरी हो सकती है। लेखक का दावा है कि ईरान पहले भी अवसर मिलने पर इस तरह की रणनीति अपनाता रहा है।
लेखक के अनुसार, ईरान के पास कई मजबूत रणनीतिक विकल्प हैं और उनमें से कुछ ट्रंप के विकल्पों से भी अधिक प्रभावशाली हो सकते हैं। वह सवाल उठाते हैं कि ट्रंप के पास अपनी शर्तें मनवाने के लिए आखिर क्या है? केवल सैन्य शक्ति? लेखक का मत है कि ईरान को केवल सैन्य बल के जरिए झुकाना संभव नहीं है। इसलिए उनका मानना है कि अमेरिका कई वर्षों तक भी सैन्य कार्रवाई जारी रखे, तब भी परिणाम जरूरी नहीं कि ट्रंप की अपेक्षाओं के अनुरूप हों।
लेखक की राय में, परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के बदले ट्रंप द्वारा दिए जा रहे प्रस्ताव ईरान को आकर्षित नहीं करेंगे। उनके अनुसार, ट्रंप चाहते हैं कि ईरान न केवल परमाणु हथियारों और परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ दे, बल्कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क भी न लगाए। इसके बदले अमेरिका तेल प्रतिबंध (Oil Sanctions) हटाने, ईरान की जमी हुई संपत्तियों (Frozen Assets) को मुक्त करने और कुछ निवेश उपलब्ध कराने की पेशकश कर रहा है।
हालांकि, लेखक का तर्क है कि यदि ईरान स्वयं इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखता है और वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलता है, तो उसे इससे कहीं अधिक आर्थिक लाभ मिल सकता है। वहीं, परमाणु हथियारों का मुद्दा, लेखक के अनुसार, ईरान के लिए एक सिद्धांतगत (Principled) विषय है, जिस पर समझौता करना उसके लिए आसान नहीं होगा।
लेखक के अनुसार, मूल रूप से ट्रंप के पास ऐसा कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है जिसके बदले ईरान उनके अल्टीमेटम (Ultimatum) को स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाए। उनका मानना है कि शायद अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कल्पना नहीं की थी कि स्थिति ऐसी बन जाएगी, जहां उन्हें स्वयं तेहरान से समझौते की अपील करनी पड़े। लेखक के अनुसार, ट्रंप को उम्मीद थी कि वह वेनेजुएला जैसी तेज़ और सफल सैन्य कार्रवाई कर पाएंगे, लेकिन घटनाक्रम उनकी अपेक्षाओं के अनुसार नहीं चला। अब, लेखक के शब्दों में, "गेंद तेहरान के पाले में है" और ईरान इस स्थिति का प्रभावी ढंग से लाभ उठा रहा है।
लेखक का मानना है कि ईरान मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को यथासंभव लंबे समय तक जारी रखने की कोशिश करेगा। उनके अनुसार, तेहरान केवल ऐसे छोटे-छोटे समझौते करने को तैयार होगा जो विवाद के मूल मुद्दों को प्रभावित न करें। लेखक का तर्क है कि ऐसी सीमित रियायतें ट्रंप के लिए स्वीकार्य नहीं होंगी, लेकिन दूसरी ओर ट्रंप के लिए भी पीछे हटना आसान नहीं होगा। इसलिए, लेखक के अनुसार, मौजूदा हालात में या तो संघर्ष जारी रहेगा या फिर स्थिति लंबे समय तक यथास्थिति (Status Quo) में बनी रह सकती है।
किए गए विश्लेषण के आधार पर लेखक का मानना है कि EUR/USD अभी भी दीर्घकालिक (Long-Term) दृष्टि से तेजी (Bullish Trend) वाले चरण में है, जबकि अल्पकालिक (Short-Term) परिप्रेक्ष्य में यह मंदी (Bearish Trend) के दौर से गुजर रहा है।
लेखक के अनुसार, मौजूदा समय लॉन्ग पोजीशन (Buy) बनाने के लिए उपयुक्त हो सकता है, हालांकि वेव 5 इन C के दौरान यह जोड़ी 1.13 के स्तर तक भी गिर सकती है। उनका कहना है कि वेव एनालिसिस अक्सर अप्रत्याशित परिणाम देता है, इसलिए वे अभी से संभावित खरीदारी की तैयारी शुरू करने की सलाह देते हैं।
लेखक के अनुसार, GBP/USD की वेव संरचना (Wave Structure) काफी जटिल हो गई है। फिलहाल इस जोड़ी में तीन गिरावट वाली वेव्स (Three Downward Waves) बन चुकी हैं, जबकि EUR/USD में संभवतः पांच वेव्स पूरी हो चुकी हैं।
उनका मानना है कि ब्रिटिश पाउंड में अभी एक और गिरावट वाली वेव बन सकती है, ठीक वैसे ही जैसे यूरो में। हालांकि, यह गिरावट संभवतः एक नए तेजी वाले ट्रेंड (New Bullish Trend) की दूसरी वेव होगी।
इसलिए लेखक को उम्मीद है कि यूरो और पाउंड की वेव संरचनाओं में कुछ अंतर रहेगा, लेकिन यह अंतर सीमित और मामूली होगा। उनके अनुसार, निकट भविष्य में पहले एक पुलबैक (Pullback) देखने को मिल सकता है, जिसके बाद एक नया तेजी वाला ट्रेंड शुरू हो सकता है। शुरुआती लक्ष्य 1.37–1.38 के आसपास बताए गए हैं।
*यहां पर लिखा गया बाजार विश्लेषण आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए किया है, लेकिन व्यापार करने के लिए निर्देश देने के लिए नहीं |
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