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15.07.202606:12 विदेशी मुद्रा विश्लेषण और समीक्षा: EUR/USD: अमेरिका की जून CPI रिपोर्ट क्या संकेत देती है?

हाल ही में प्रकाशित अमेरिका की जून उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) रिपोर्ट अमेरिकी डॉलर (ग्रीनबैक) के पक्ष में नहीं रही। रिपोर्ट के सभी प्रमुख आंकड़े अनुमानों से कमजोर रहे, जो यह दर्शाते हैं कि महंगाई (Inflation) की रफ्तार धीमी पड़ रही है। इससे डॉलर को बड़ा झटका लगा और वह दबाव में आ गया। यही कारण रहा कि मध्य पूर्व में तनाव के एक और दौर के बावजूद डॉलर भू-राजनीतिक घटनाओं का लाभ उठाने में विफल रहा।

विशेष रूप से, EUR/USD मुद्रा जोड़ी ने दिन के निचले स्तर (Intra-day Low) से लगभग 100 पिप्स की तेज़ बढ़त दर्ज की और 1.1460 के प्रतिरोध स्तर (Resistance Level) का परीक्षण किया। यह स्तर H4 (4-घंटे) के चार्ट पर बोलिंजर बैंड्स (Bollinger Bands) की ऊपरी रेखा के अनुरूप है। अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में भी इसी तरह के बदलाव देखने को मिले, जो समग्र रूप से अमेरिकी डॉलर की कमजोरी को दर्शाते हैं।

मेरे विचार में, प्रमुख आर्थिक संकेतकों और रिपोर्ट के मुख्य घटकों के प्रदर्शन को देखते हुए बाजार की यह प्रतिक्रिया पूरी तरह उचित और तार्किक थी।

Exchange Rates 15.07.2026 analysis

जून में अमेरिका का समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI) मासिक आधार पर -0.4% दर्ज किया गया, जबकि बाजार को -0.1% की गिरावट की उम्मीद थी। यह सूचकांक पिछले वर्ष अप्रैल के बाद पहली बार नकारात्मक क्षेत्र में पहुंचा है और छह वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। वहीं, वार्षिक आधार (Year-on-Year) पर समग्र CPI भी 4.2% (तीन साल के उच्च स्तर) से घटकर 3.5% पर आ गया। अधिकांश विश्लेषकों ने इसके 3.8% तक गिरने का अनुमान लगाया था।

कोर महंगाई (Core Inflation) में भी नरमी देखने को मिली, जबकि अधिकांश विशेषज्ञों का मानना था कि जून में यह मई के स्तर पर ही बनी रहेगी। मासिक आधार पर कोर CPI 0.0% रहा, जबकि बाजार को 0.2% की बढ़ोतरी की उम्मीद थी। वहीं वार्षिक आधार पर कोर CPI 2.9% से घटकर 2.6% पर आ गया, जबकि अनुमान 2.8% का था।

समग्र महंगाई की संरचना से पता चलता है कि ऊर्जा क्षेत्र (Energy) ने इसमें गिरावट लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जून में ऊर्जा सूचकांक 5.7% गिर गया, जबकि पिछले महीनों में इसमें तेज बढ़ोतरी देखी गई थी। विशेष रूप से पेट्रोल (Gasoline) की कीमतों में आई गिरावट समग्र CPI में कमी का प्रमुख कारण बनी।

जून में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को देखते हुए यह रुझान काफी हद तक अपेक्षित था। इसलिए बाजार के लिए कोर महंगाई के आंकड़े अधिक महत्वपूर्ण साबित हुए, क्योंकि इनमें भी उम्मीद से अधिक नरमी देखने को मिली।

सबसे पहले, यह संकेत मिलता है कि वसंत (Spring) के दौरान महंगाई में आई तेजी शायद एक अस्थायी घटना थी, न कि किसी नए और लंबे समय तक चलने वाले महंगाई चक्र की शुरुआत। कुछ समय पहले तक कई बाजार प्रतिभागियों और फेडरल रिजर्व के कुछ अधिकारियों को चिंता थी कि उत्पादकों की बढ़ती लागत धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकती है और इससे महंगाई की दूसरी लहर शुरू हो सकती है। हालांकि, जून के आंकड़े फिलहाल इस आशंका की पुष्टि नहीं करते।

दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर महंगाई में गिरावट उन क्षेत्रों में देखने को मिली, जिन पर फेड विशेष रूप से ध्यान देता है। सेवा क्षेत्र (Services Sector), जो आमतौर पर महंगाई का सबसे मजबूत हिस्सा माना जाता है, वहां कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रही। साथ ही घरेलू कीमतों पर भी अतिरिक्त दबाव नहीं बढ़ा। इससे संकेत मिलता है कि महंगाई का मूल रुझान लगातार फेड के 2% लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि जून में कोर CPI की वार्षिक गिरावट केवल पिछले वर्ष के उच्च आधार (Base Effect) की वजह से नहीं हुई, बल्कि इसलिए भी हुई क्योंकि मासिक आधार पर कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। वास्तव में, कोर CPI लगातार दूसरे महीने मासिक आधार पर कमजोर हुआ है — अप्रैल में 0.4%, मई में 0.2%, और जून में 0.0%। यह फेड के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है क्योंकि इससे पता चलता है कि महंगाई की गति (Inflationary Inertia) लगातार कम हो रही है।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। समग्र वार्षिक CPI अभी भी 3.5% पर है, जो फेड के 2% लक्ष्य से काफी ऊपर है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। यदि तेल की कीमतों में फिर तेजी आती है, तो परिवहन और ऊर्जा लागत बढ़ने से समग्र महंगाई पर दोबारा दबाव पड़ सकता है।

फिर भी, जून की CPI रिपोर्ट ने फेड की भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर नरम रुख (Dovish Stance) अपनाने के पक्ष में एक मजबूत तर्क दिया है। उदाहरण के लिए, CME FedWatch Tool के अनुसार, जुलाई की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना रिपोर्ट जारी होने से पहले 30–35% थी, जो अब घटकर केवल 12% रह गई है।

इस रिपोर्ट पर डॉलर की प्रतिक्रिया भी काफी महत्वपूर्ण रही। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद डॉलर को पूरा समर्थन नहीं मिल सका। दूसरी ओर, महंगाई रिपोर्ट के बाद डॉलर इंडेक्स (DXY) तेज़ी से गिरकर 101.14 से 100.30 पर आ गया। इससे स्पष्ट होता है कि इस समय मुद्रा बाजार में फेड की भविष्य की ब्याज दर नीति को लेकर उम्मीदें ही सबसे बड़ा कारक बनी हुई हैं।

EUR/USD के संदर्भ में, निकट अवधि का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या खरीदार (Buyers) CPI रिपोर्ट के बाद बनी तेजी को आगे भी जारी रख पाते हैं। ट्रेडर्स को विशेष रूप से 1.1460 के प्रतिरोध स्तर (Resistance Level) पर नजर रखनी चाहिए, जो H4 टाइमफ्रेम पर बोलिंजर बैंड्स (Bollinger Bands) की ऊपरी रेखा के अनुरूप है।

यदि EUR/USD इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिक जाता है, तो इसके लिए 1.1550 की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। यह स्तर साप्ताहिक (W1) चार्ट पर बोलिंजर बैंड्स की मध्य रेखा के पास स्थित अगला प्रमुख लक्ष्य है। वहीं, यदि खरीदार 1.1460 के प्रतिरोध स्तर को पार करने में विफल रहते हैं, तो यह संकेत होगा कि जोड़ी कुछ समय तक समेकन (Consolidation) में रह सकती है और इसके बाद 1.1380–1.1410 के दायरे तक वापस फिसलने (Pullback) की संभावना बन सकती है।

*यहां पर लिखा गया बाजार विश्लेषण आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए किया है, लेकिन व्यापार करने के लिए निर्देश देने के लिए नहीं |

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